Tuesday, 5 August 2014

हाइकू



सूरज जला
धुवां हुई तिल्ली
चाँद ढूंढें है!

समंदर में
तरस के मायने
ढूंढें मछली!

उजाले जला
खुद का मानी क्यों
ढूंढें बिजली

खुशबू संग,
बेपरवा सी उड़ी
देखो तितली!

नीरव वैद्य

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