Tuesday, 5 August 2014

आयो आषाढ़!

सावन बहे
छाते तैरे हज़ार
आयो आषाढ़!

ओस के धागे
ले मौसम भागे है
भीगा संसार

बूंदों की आस
गूगल में ना ढूंढ
रूह भीगोले

रुत बरसे
गीली सांसें खेले है
बूंदों की...होली...


नीरव

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